पूर्ववर्ती वाम सरकार के घपलों और घोटालों की जांच के लिए पश्चिम बंगाल में विशेष ऑडिट कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि दिवालिया होने के कगार पर खड़े सूबे को आर्थिक पटरी पर लाने के लिए केंद्र से मदद की गुहार की गई है। बनर्जी के अनुसार प. बंगाल को केंद्रीय मदद पर नजरिया बदलना होगा। उसे दूसरे राज्यों के समकक्ष नहीं रखा जा सकता है, क्योंकि यह राज्य अति पिछड़ा और गरीब बन चुका है। केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में बनर्जी ने कहा कि राज्य के खस्ताहाल होने की वजह तलाशने के लिए स्पेशल ऑडिट कराया जाएगा। इसके लिए नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (सीएजी) से आग्रह किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती वाम सरकार ने बंगाल की हालत इतनी खराब कर दी कि राज्य में बुजुर्गो, विधवाओं और विकलांगों की पेंशन तक बंद कर दी गई थी। गरीबों को राशन प्रणाली से रियायती अनाज बंद कर दिया गया था। वामपंथी सरकार ने केंद्र सरकार से मिले 17 हजार करोड़ के कर्ज को दो महीने में खर्च करने का रिकॉर्ड कायम किया था। उसमें भारी वित्तीय घपलों की आशंका है। बंगाल के आर्थिक पैकेज के बाबत पूछे सवालों को ममता टाल गई। उन्होंने कहा कि केंद्र को राज्य की स्थितियों से अवगत करा दिया गया है। इस पर विस्तार से अभी चर्चा होनी है। ममता मंगलवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी मुलाकात कर उनसे राज्य की राजनीतिक और आर्थिक हालत के बारे में चर्चा करेंगी। लोकपाल पर एक सवाल के जवाब में ममता ने कहा कि भ्रष्टाचार हटना चाहिए लेकिन हर राजनीतिज्ञ को भ्रष्टाचारी मान लेना ठीक नहीं। इंडिया गेट के चक्कर : मुख्यमंत्री के रूप में ममता बनर्जी सोमवार को पहली बार राजधानी दिल्ली आई। सबसे पहले उन्हें वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी से शाम पांच बजे मिलना था। उनके काफिले में सुरक्षा बलों और अधिकारियों की कोई एक दर्जन गाडि़यां थीं, लेकिन बनर्जी खुद अपनी पुरानी जेन में थीं, जिसे उनके निजी सचिव चला रहे थे। हवाई अड्डे से वह नॉर्थ ब्लॉक सवा चार बजे ही पहुंच गई। समय से पहले पहुंच जाने की वजह से उनका काफिला राजपथ की ओर एक बार फिर मुड़ गया। उनकी जेन गाड़ी इंडिया गेट के चक्कर काटने लगी। किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि दीदी सोच क्या रहीं है। लगभग 15 मिनट बाद काफिला फिर नॉर्थ ब्लॉक पहुंच गया।
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