Wednesday, June 15, 2011

वामपंथ का किला बचाने को माकपा व भाकपा कर सकते हैं विलय


राष्ट्रीय राजनीति में वामपंथी विचारधारा के Oास को रोकने और विभिन्न राज्यों में वामपंथ के ढहते किले को बचाने के लिए निकट भविष्य में माकपा और भाकपा का विलय हो सकता है। विलय की समय सीमा और प्रक्रिया कितनी लंबी होगी, अभी यह नहीं बताया जा सकता। मा‌र्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) पोलित ब्यूरो सदस्य सीताराम येचुरी ने सोमवार को दोनों दलों के विलय के संकेत दिए। येचुरी ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा, दोनों दलों का विलय चाहे कितना ही वांछित क्यों नहीं हो, उसे एक खास प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसे करने का एक तरीका विभिन्न जन संगठनों का एकीकरण और निचले स्तर पर संयुक्त गतिविधियां है। मैं समझता हूं कि ज्यादा टिकाऊ रास्ता यही है, इसके बजाय कि नेतृत्व स्तर पर एकीकरण हो। यह प्रक्रिया चल रही है और दोनों पार्टियां जनसंगठन स्तर पर एक साथ काम कर रही हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या यह प्रक्रिया अंतत: दोनों दलों को विलय की तरफ ले जाएगी तो उन्होंने कहा, उम्मीद है कि ऐसा होगा। हालांकि हम इसी कोई समय सीमा नहीं दे सकते, लेकिन वामपंथ के सभी शुभचिंतक चाहते हैं कि यह यथाशीघ्र हो। माकपा नेता ने भ्रष्टाचार से संघर्ष के प्रति अपनी पार्टी की वचनबद्धता जाहिर करते हुए कहा,माकपा ने समग्र भ्रष्टाचार निरोधी उपायों की मांग की है जिनमें प्रधानमंत्री को दायरे में लाते हुए प्रभावी लोकपाल कानून का निर्माण,न्यायपालिका पर निगरानी के लिए राष्ट्रीय न्यायिक आयोग के गठन और चुनाव में धनबल पर अंकुश लगाने के लिए चुनाव सुधार शामिल है। हजारे और बाबा रामदेव के अभियान के बारे में पूछे जाने पर येचुरी ने कहा, उन्होंने जो मुद्दा उठाया है वह अहम है, पर मैं नहीं समझता कि कोई यह दावा कर सकता है कि वे समूचे नागरिक समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। हम क्या हैं? गैर नागरिक समाज :अनसिविल सोसाइटी:? हर कोई नागरिक समाज का हिस्सा है। उन्होंने कहा, वह मतदाताओं पर हजारे के बयान से असहमत हैं। मतदाताओं और चुनावी लोकतंत्र के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए क्योंकि इन्हीं मतदाताओं ने एक बार आपातकाल के थोपे जाने और देश पर सांप्रदायिकता के थोपे जाने को शिकस्त दी है।


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